Arvaz Ahmad

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04-Jun-2022 لیکھنی کی کہانی -prtiyogita k liye

वो भी बेबफा था मैं भी बेबफा थी 

इसमें न जाने किसकी ख़ता थी 
दिल को लगाना मेरे बन गई सज़ा थी 
इसमें न जाने किसकी ख़ता थी 

  उनकी खुशी कि  ख़ातिर बिछड़े थे उनसे 
दिल से मुहब्बत लेकर निकले थे उनके
उनको लगा के हमने की वो दग़ा थी 
इसमें न जाने किसकी ख़ता थी 
......वो भी बे

जाएंगे वो दूर तो हम बुलाएंगे कैसे 
यादें उनकी दिल में होंगी मिटाएंगे कैसे 
भुलाएंगे कैसे उनको भुलाना भी जफा थी 
इसमे न जाने किसकी ख़ता थी 
......वो भी बे

जिनको अपना कहते थे वो अजनबी से लगते हैं 
ग़ैरों के वो हो गए और मतलबी से लगते हैं
 रोते रोते रातें गुज़रीं गिला किससे करते हम 
हमको रूलाना उनकी बन गई अदा थी
..... वो भी बे 

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5 Comments

Gunjan Kamal

04-Jun-2022 08:23 AM

👌👏🙏🏻

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Sona shayari

04-Jun-2022 08:02 AM

Nice

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Arvaz Ahmad

09-Jun-2022 11:50 AM

Shukriya

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Renu

04-Jun-2022 03:14 AM

👍👍

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Arvaz Ahmad

04-Jun-2022 03:25 AM

Bhot shukriya

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